Friday, 11 May 2012

चश्मा उतार कर &&&&&&&&












नयनों से नयन मिलाईये ;  
चश्मा उतार कर I
होंठों को बन्द कीजिये ;
 चश्मा उतार कर ....II
बोलती तो आँखें हैं ,
पर्दा ना कीजिये I
बहाना धूप का ना कीजिये;
 चश्मा उतार कर.... II
छाजाये नभ में बादल ;
इन आँखों को देख करI
धरती की प्यास बुझाईये ; 
चश्मा उतार कर .....II
इन आँखों को देखने;
 सुरज दहक रहा हैI
  अब आप मान जाइए
   चश्मा उतार कर .....II  --.श्री राम राय
                   
                                      

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