Saturday, 12 May 2012

भूख की आग में ;

भूख की आग में ;
यौवन का सूरज ढल जायेगा...!!!
सोचता रहता;सुबह - शाम,
 क्या भोजन मिल पायेगा..???
जो करोड़ो के मालिक ,
उसकी बात नहीं करता I
जिसकी झोपड़ी जल चुकी,,
जो फुट्पाथों पे रहता!!!!
उसकी खातिर क्या कभी !!!!
सिंहाशन हिल पायेगा..???
हड्डियाँ बुढी हुई ;
कहाँ पाया जीवन का स्वाद!!
देख समाज मुँह फेरता ..,
जैसे बहते देख मवाद!!!
क्या सत्यमेव के आँगन में !!!
फूल श्री का खिल पायेगा..???
--------------------श्री राम
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