Monday, 16 September 2013

रात से दिन ……


(मित्रों प्रस्तुत है मेरी रस -भरी नायाब रचना ;समझने की कृपा करेंगे……. )
रूप -रंग का वर्णन तेरा ,
कैसे करूं समझा देना । 
अभी तेरी तस्वीर बनायी ,
रात गगन में आजाना ॥ 
शाम ढलेगी जब रात में ,
सारे दीये बुझा दूंगा  । 
देख ना ले कोई तुमको ,
तारों से नजर चुरा आना ॥ 
तस्वीर तेरी कागज़ पे होगी ,
आएगी अंगड़ाई फिर ।
 सपनो में गर खो जाऊं ,
खिड़की से बुला लेना ॥ 
गर खिड़की बंद रहेगी ,
दरवाजा भी बंद रहेगा ।
 आहट तुम जो दे न सको ,
झोंका हवा का भिजवा देना ॥ 
आ तुम्हे घूँघट डाल दूँ ,
आसमान के लाली की । 
अब दुनिया सोने न देगी ,
तुम  जा कर के सो जाना ॥ 
-------श्री राम रॉय 
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