Sunday, 29 June 2014

तुम्हारी याद--डायरी के पन्ने

एक कबिता है --
याद तुम्हारी ,
जो/
 हृदय को /
अपने आँचल से /
ढँक कर/ 
स्नेह भरे,
शाँत हरियाली वाले ,
गाँव में /
विश्राम करने को /
बाध्य करती है /
जहाँ --
हवा के साथ /
सिरहाने रखी /
डायरी के पन्ने /
फड़फड़ा कर/
 लकीर खींच /सहलाने के लिए /
उंगलिओं बीच कलम थमा देते हैं /
और सहलाने /
लगता हूँ /
कोरे पन्ने को /
तुम्हारे /
चिकने बदन सा ॥ 
--------shreeram roy
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