Sunday, 3 August 2014

जिंदगी ,जिंदगी है ||

जमीं आकाश के नीचे बेघर है । 
जिंदगी मौत से भी बदत्तर है ॥ 

दिल  दरिया समंदर का पानी 
दो पल की ख़ुशी ग़मे सागर है ॥ 

महबूब का हर पल क़यामत का 
यूँ कहें जिंदगी आशिके जहर है ॥ 

जिंदगी कड़ी धूप है चौराहे पर 
जिंदगी फूल काँटो के अंदर है ॥ 

जिंदगी बेहोश ,जोश में अगर हो 
  जिंदगी ,जिंदगी है बहुत सुन्दर है 

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