Monday, 2 February 2015

आया बसंत-----!


प्रथम किरण  से  खिले
 प्रथम कमल का पुष्प लिये
 प्रथम धार के
प्रथम वेग को
प्रथम अधरों से चूमता
 प्रथम प्रथम आता
प्रथम वीणा के झंकार से
प्रथम पहर गाता संत
प्रथम प्रथम आता बसंत ।।

उमंगों की धरा
रंगीन हंसी नजारा
बेल बसंत से
लिपटी हुई
कोयलिया की कु कु को
आम मंजरियों से देख खेलते
कुछ कहते न बनते !
तुम जो आये बसंते!!!
------श्रीराम

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