Saturday, 21 February 2015

नयी जिन्दगी का अहसास...

(नमस्कार!!आप विद्वान मेरी कविता को गहराई से पढ़ें और अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन देने की कृपा करें--आपका श्रीराम)

नन्हा सूरज दिखता जब;
  पल ख़ास होता है।
हर सुबह नयी जिन्दगी का;
   एहसास होता है।।

भींगे ओस से निर्मल;
दुनिया जाग जातीहै ।
 मुस्कती मस्तानी हवा;
शैर को बाग आती है।
नव किरणों के आने से;
रंगीन आकाश होता है।।

शांत सरोवर का तट;
कली कमल के फूले।
मन में नाचे मोर ऐसे;
जैसे सावन में झूले ।
पंछी के झंकृत कोलाहल;
काम क्रोध भी नाश होता है।।

दोपहर की धूप में;
छाया बन छा सकता ।
जीवन हंस सुबह में;
जीवन मोती पा सकता।
जीवन साजन सजकर;
सजनी के पास होता है।।
      ----श्रीराम
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