Saturday, 21 March 2015

तुम्हारे यादों जैसी.....


मेरी
डायरी के
पन्नों बीच
बरसों पड़े
गुलाब की
पंखुड़ियाँ
ज्यों की त्यों हैं
तुम्हारे यादों जैसी।
 उसका रंग भी
 वही गुलाबी है
जिसतरह
चिकने तुम्हारे
होंठ थे
तुम्हारी
झील सी
आँखों के आगे
चैत की
मस्त बयार में
किये वादों जैसी।
परन्तु
इसकी खुशबू
किसी
 पतंगे के
 इन्तजार में
पुरानी पड़ गयी है ।।।

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