Sunday, 24 May 2015

भीषण अगन है।।



जलाता पवन है।
भीषण अगन है।।
 
मौसम का कहर।
सुबह हुआ दोपहर।।

शाम लगी आग।
नींद गयी भाग।।

छाया कहीं न।
जिश्म बे पसीना।।

चढ़ गया पारा।
लुप्त जल धारा।।

विकास की कहानी।
प्रलय की निशानी।।
 ---------@sriramroy
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