Tuesday, 1 November 2016

मंजिल देखा केवल हमने

कहाँ से पूरे होंगे वे सपने,
कहाँ से आएंगे वे अपने?
थके-थके नैनों से अबतक,
राह निहारा केवल हमने।।

सपनों में संसार बुना,
लाखों में एक चुना
उनके आने की खबर पढ़ी,
अबतक आहट नही सुना।
सुना तो केवल इतना सुना,
पुरे न होते सपने!!!

झीलों में खिले कमल देखा,
देखते ही भौरे ने टोका
नजरों से क्यों पीते हो,
शर्माते हुए खुद को रोका।
हाथ में आये फूलों को,
कभी नही तोड़ा हमने!!!

आसमान में नाव चले,
सूरज से मोती ढले
चाँद सिमट कर पास रहे,
पल में उनका साथ मिले।
जकड़ लूँ उनको बाहों में,
पास हों वे मेरे इतने!!!

दिल को सदा समझाता ,
पर नादान समझ न पाता
बादल से टकराने अरमान चले,
मै धरा पे आहें भरता।
राहें किधर हैं पता नहीं,
मंजिल देखा केवल हमने!!!
----@श्री राम रॉय 9471723852

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