Sunday, 27 November 2016

गरीबों के आंगन बहार

देखा है पहली बार,
गरीबों के आंगन बहार।।

मुश्किल हो गया जीना,
अमीरों की चुए पसीना
अमीरों के घर हाहाकार।।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

भरी हुई तिजोरी,
बिना छेनी-हथौड़ी के तोड़ी
उजड़ गया घर द्वार।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

चुभे नोटों की माला,
गुलाबी मुँह हुआ काला
खजाने में नोट मांगे उधार।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

जो काला धन खाते,
अब ढूँढे गरीबों के खाते
गरीबों के जगमग हुए संसार।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

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