Sunday, 19 February 2017

मेरा महबूब किसी गैर के देश जा रहा है

इस धुआँ इस शर्द मौसम से
यह सन्देश आ रहा है।
मेरा महबूब किसी गैर के
देश जा रहा है।।

रात रात भर जागकर
बसाते रहा सपनो का नगर ,
आज अपना शहर छोड़
परदेश जा रहा है।।

कुछ बात थी ऐसी
सहारा सांसो को मिलता था,
धड़कन जा रही है अब
समय शेष जा रहा है।।

साथ बिताने में भी कुछ पल का
परहेज है उसे,
चंद सिक्कों की खनक में
विदेश जा रहा है।।
@sriramroy

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