Saturday, 18 March 2017

भारत माता

दिन में हुई रात!
गर्मी में बरसात!!
कैसे हुई
ऐसी बात!
न सूरज निकला
न चाँद आया,
न लू चली,
न बादल छाया।।
चमकी केवल
विजलियाँ ऐसे
जैसे
सूरज हो जलाता,
चाँद हो चमकता ।
गगन से
धरा पर,
आँधियों में कुछ
उड़ा घर।
छप्पड़ को लगा
थप्पड़ किसीका-
बत्तियों में
धुंआ ही धुआं था,
न आग लगी
पर सबकुछ जला था,
शहरो से दूर
लोग चिल्ला रहे थे,
रोटी, मकान के लिए।
लाश जलाने शमशान के लिए।
झोपड़ी में माँ,
बच्चे को लहू पिला रही थी।
शहरों में बैठी दौलत,
कुत्ते को दूध पिला रही थी।।।

Post a Comment
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...