Tuesday, 8 May 2018

बेटियाँ मोम की

गलियों से निकल
चौराहे पर
बढ़ते जा रहे
कुछ हाथो में
तख्तियां
कुछ हाथों में
मोमबत्तियां।
निःशब्द अंधेरे में
जलती मोमबतियो के
प्रकाश में
उसकी धुँधली फ़ोटो
जो, भेड़िये से संघर्ष में
बचा न पाई बोटियाँ।
भेड़ियों से बेटे
हिरण सी बेटियाँ
देख न पाती दुनिया।
छुपती, सहमति
बहुत मजबूरी
जीने को छटपटाती
मोम सी बेटियाँ,
पूछती चौराहे पर
टिमटिमाती मोमबतियां
कब तक जलेगी बेटियाँ....

---/श्री राम रॉय

Post a Comment
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...