Showing posts with label आँखें. Show all posts
Showing posts with label आँखें. Show all posts

Tuesday, 3 September 2013

स्वप्न सुहाने सुबह के …।


आँखों से अलसाई है 
तन - मन में अंगराई है।
 जब - जब आया यह मौसम  ;
याद किसीकी आई है ...।।

आँख खुली जब सपने में 
देखा चाँद मुस्काते हुए ;
सूरज की गर्मी जो  लगी  -
उठ्बैठे  तब सोते हुये ।
स्पर्श मिला किसीका ;
देखा कोमल कलाई है ..।।

थपकी धिरे से लगी 
हृदय मध्य को बाद में ;
लिया भींच बाहों में ,
खोया था उसकी यादों में।
खनक उठी झंकार कोई ;
सोचा कि शर्माई है ..।।

छोड़ सका नही सेज को 
सुबह गुजर गई शाम में ;
जिहवा फिरती रह गई ,
होठों के खाली जाम में ।
जीवन मधुवन कंचन- कंचन ;
 बहे "राम " पुरवाई है ..।।
 ---श्री राम रॉय 

Saturday, 6 July 2013

याद प्यार के …।


चुपके से जब उन्होंने ...
ख़त खोला होगा ...
उनकी बगिया में ...
मोर बोला होगा ....॥
*************
आँखों में बहार छायेगी ...
तितली सा उड़ गाएगी ..
तब उनके दिल का ....
झुमका डोला होगा ....॥
*************
छूट न जाए हाथों से ....
खो न जाए रातों से ....
फिर तकिये के निचे .....
.कुछ टटोला होगा ......॥
*************
सपनो में वो बुलाएगी ...
.नींद उनको न आएगी ....
दिल में शबनम तो ....
आँखों में शोला होगा ...॥
   ------- श्री राम रॉय

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...