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Monday, 17 October 2016

भावी

मैंने कहा
सबने सुना ।।।
जो होना होगा
वही होगा।।
किसीने माना
कोई न माना।।।
जिसने जाना
उसने माना।।।
और--
सांसारिकता से
निशचिंत होगया।।।
जिसने न जाना
उसने न माना।।।
और---
सांसारिकता में
चित्त होगया!!!!

Saturday, 21 February 2015

नयी जिन्दगी का अहसास...

(नमस्कार!!आप विद्वान मेरी कविता को गहराई से पढ़ें और अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन देने की कृपा करें--आपका श्रीराम)

नन्हा सूरज दिखता जब;
  पल ख़ास होता है।
हर सुबह नयी जिन्दगी का;
   एहसास होता है।।

भींगे ओस से निर्मल;
दुनिया जाग जातीहै ।
 मुस्कती मस्तानी हवा;
शैर को बाग आती है।
नव किरणों के आने से;
रंगीन आकाश होता है।।

शांत सरोवर का तट;
कली कमल के फूले।
मन में नाचे मोर ऐसे;
जैसे सावन में झूले ।
पंछी के झंकृत कोलाहल;
काम क्रोध भी नाश होता है।।

दोपहर की धूप में;
छाया बन छा सकता ।
जीवन हंस सुबह में;
जीवन मोती पा सकता।
जीवन साजन सजकर;
सजनी के पास होता है।।
      ----श्रीराम

Sunday, 29 December 2013

आदमखोर आदमी ……!!


हाय !!
 एक चिल्लाहट के साथ
हजारों हाथ
दुआ में उठ खड़े हुए ;
 बेटी की
इज्जत भरे बाजार
 कुछ समाज के
ठेकेदारों ने
नीलाम दिए ।
वह केवल वह
नन्ही लड़की ---
अपने दोनों हाथों को
उठाकर अपने
 सिने को ढ़ाँप कर
आकाश की ओर
 देख रही थी ,
थोड़ी सी बददुआ
मांग रही थी -----
अपने लिए -------
समाज के लिए !!!
-----श्रीराम रॉय 
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