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Saturday, 9 May 2015

ज़ी बहुत सुन्दर है।।

जमीं आकाश के नीचे बेघर है।
ज़िन्दगी मौत से भी बद्तर है।।


दिल दरिया समंदर का पानी
दो पल की  ख़ुशी गमे सागर है।।


महबूब का हर पल क़यामत का
यूँ कहे जिन्दगी आशिके जहर है।।


जिन्दगी कड़ी धुप है चौराहे पर
जिन्दगी फूल काँटो के अंदर है।।


जिन्दगी बेहोश न जोश में अगर
जिन्दगी जिन्दगी है बहुत सुन्दर है।।
      -----श्री राम

Friday, 10 May 2013

जिंदगी उनको बुलाने लगी है,,,,


याद उनकी आज  आने लगी है **
जिंदगी फिर उनको बुलाने लगी है॥

नींद आती नही रात कटती नहीं ,

याद में जान उनकी जाने लगी है ॥

दिल टुटा उनका संग छुटा उनका ,

आँखे फिर से डब -डबाने लगी है ॥

ना जाने कहाँ .उनका कैसा जहाँ ,

सोच में पड़ी जाँ घबडाने लगी है॥

पल में  आ जाना चेहरा दिखाना,

राय दुनिया अँधेरा छाने लगी है॥ 
       ---------श्री राम  रॉय 

Saturday, 30 March 2013

पत्थर भी एकदिन पिघल जाते हैं

वक्त  आने  पे जो न संभल पाते हैं......। 

 फिर  शहर खंडहर में बदल जाते हैं.....||

                  

उनकी गुस्ताखियों का यही है सबब,

दिल  लगाते ही बेदिल हो जाते हैं......||

फिर  शहर खंडहर में बदल जाते हैं........

                   
 आँसुओं  की कीमत  जो जाने नही,

 एक दिन ख़ाक में वो मिल जाते हैं....||

फिर  शहर खंडहर में बदल जाते हैं........

                         
आशिकों  की  आह  मानों  आँधियाँ, 

चिरागों से चमन भी जल जाते हैं...... ||  

 फिर  शहर खंडहर में बदल जाते हैं.............

                    
''राय ''  खुद   पे गुरुर न इतना करो,

पत्थर भी एकदिन पिघल जाते हैं ..... || 

फिर  शहर खंडहर में बदल जाते हैं ...................

                           -----------    श्रीराम रॉय --------

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