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Monday, 25 November 2013

उसका चेहरा कैसा होगा


ऐ चाँद तुम्हीं ये बतलाना ;उसका चेहरा कैसा होगा । 
जिसकी हँसी है तेरी चाँदनी ;उसका चेहरा कैसा होगा ॥ 

जिसके पलकों के उठते ही ;सागर भी शरमा जाता । 
जिसकी आँखें झील सी नीली ;उसका कजरा कैसा होगा ॥
 
साँसों में सावन की छमक ;टिप -टिप -टिप रस बरसे । 
जिसके केशों में हो रेशम ; उसका गजरा कैसा होगा ॥

नीलकमल को चूमेगा भौंरा ;उसका पता बतला दो न । 
तुम पर लाखों तारों का पहरा ;उसपर पहरा कैसा होगा ॥ 
                       --------------श्री राम रॉय 

Monday, 16 September 2013

रात से दिन ……


(मित्रों प्रस्तुत है मेरी रस -भरी नायाब रचना ;समझने की कृपा करेंगे……. )
रूप -रंग का वर्णन तेरा ,
कैसे करूं समझा देना । 
अभी तेरी तस्वीर बनायी ,
रात गगन में आजाना ॥ 
शाम ढलेगी जब रात में ,
सारे दीये बुझा दूंगा  । 
देख ना ले कोई तुमको ,
तारों से नजर चुरा आना ॥ 
तस्वीर तेरी कागज़ पे होगी ,
आएगी अंगड़ाई फिर ।
 सपनो में गर खो जाऊं ,
खिड़की से बुला लेना ॥ 
गर खिड़की बंद रहेगी ,
दरवाजा भी बंद रहेगा ।
 आहट तुम जो दे न सको ,
झोंका हवा का भिजवा देना ॥ 
आ तुम्हे घूँघट डाल दूँ ,
आसमान के लाली की । 
अब दुनिया सोने न देगी ,
तुम  जा कर के सो जाना ॥ 
-------श्री राम रॉय 

Sunday, 8 September 2013

सजन आपके......



फूलों से भर गये हैं चमन आपके I
भींगे खुशबु से हैं जो बदन आपके II



आप हँसते हैं तो भौंरे आ जाते हैं**
और मचलते हैं छूने सुमन आपकेII



अपने घुंघट को थोड़ा गिरा लीजिये**
अब चलाते हैं खंजर नयन आपकेII



हम पराये नहीं,न मुसाफिर कोई**
जलाते हैं हम को अगन आपकेII


इन होंठों को राय न खोला करें **
जो कहते हैं  हम न सजन आपकेII


               --------श्री राम राय
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