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Thursday, 3 November 2016

मंजिल देखा केवल हमने

कहाँ से पूरे होंगे वे सपने,
कहाँ से आएंगे वे अपने?
थके-थके नैनों से अबतक,
राह निहारा केवल हमने।।

सपनों में संसार बुना,
लाखों में एक चुना
उनके आने की खबर पढ़ी,
अबतक आहट नही सुना।
सुना तो केवल इतना सुना,
पुरे न होते सपने!!!

झीलों में खिले कमल देखा,
देखते ही भौरे ने टोका
नजरों से क्यों पीते हो,
शर्माते हुए खुद को रोका।
हाथ में आये फूलों को,
कभी नही तोड़ा हमने!!!

आसमान में नाव चले,
सूरज से मोती ढले
चाँद सिमट कर पास रहे,
पल में उनका साथ मिले।
जकड़ लूँ उनको बाहों में,
पास हों वे मेरे इतने!!!

दिल को सदा समझाता ,
पर नादान समझ न पाता
बादल से टकराने अरमान चले,
मै धरा पे आहें भरता।
राहें किधर हैं पता नहीं,
मंजिल देखा केवल हमने!!!
----@श्री राम रॉय 9471723852

Tuesday, 1 November 2016

मंजिल देखा केवल हमने

कहाँ से पूरे होंगे वे सपने,
कहाँ से आएंगे वे अपने?
थके-थके नैनों से अबतक,
राह निहारा केवल हमने।।

सपनों में संसार बुना,
लाखों में एक चुना
उनके आने की खबर पढ़ी,
अबतक आहट नही सुना।
सुना तो केवल इतना सुना,
पुरे न होते सपने!!!

झीलों में खिले कमल देखा,
देखते ही भौरे ने टोका
नजरों से क्यों पीते हो,
शर्माते हुए खुद को रोका।
हाथ में आये फूलों को,
कभी नही तोड़ा हमने!!!

आसमान में नाव चले,
सूरज से मोती ढले
चाँद सिमट कर पास रहे,
पल में उनका साथ मिले।
जकड़ लूँ उनको बाहों में,
पास हों वे मेरे इतने!!!

दिल को सदा समझाता ,
पर नादान समझ न पाता
बादल से टकराने अरमान चले,
मै धरा पे आहें भरता।
राहें किधर हैं पता नहीं,
मंजिल देखा केवल हमने!!!
----@श्री राम रॉय 9471723852

Monday, 25 November 2013

उसका चेहरा कैसा होगा


ऐ चाँद तुम्हीं ये बतलाना ;उसका चेहरा कैसा होगा । 
जिसकी हँसी है तेरी चाँदनी ;उसका चेहरा कैसा होगा ॥ 

जिसके पलकों के उठते ही ;सागर भी शरमा जाता । 
जिसकी आँखें झील सी नीली ;उसका कजरा कैसा होगा ॥
 
साँसों में सावन की छमक ;टिप -टिप -टिप रस बरसे । 
जिसके केशों में हो रेशम ; उसका गजरा कैसा होगा ॥

नीलकमल को चूमेगा भौंरा ;उसका पता बतला दो न । 
तुम पर लाखों तारों का पहरा ;उसपर पहरा कैसा होगा ॥ 
                       --------------श्री राम रॉय 

Monday, 16 September 2013

रात से दिन ……


(मित्रों प्रस्तुत है मेरी रस -भरी नायाब रचना ;समझने की कृपा करेंगे……. )
रूप -रंग का वर्णन तेरा ,
कैसे करूं समझा देना । 
अभी तेरी तस्वीर बनायी ,
रात गगन में आजाना ॥ 
शाम ढलेगी जब रात में ,
सारे दीये बुझा दूंगा  । 
देख ना ले कोई तुमको ,
तारों से नजर चुरा आना ॥ 
तस्वीर तेरी कागज़ पे होगी ,
आएगी अंगड़ाई फिर ।
 सपनो में गर खो जाऊं ,
खिड़की से बुला लेना ॥ 
गर खिड़की बंद रहेगी ,
दरवाजा भी बंद रहेगा ।
 आहट तुम जो दे न सको ,
झोंका हवा का भिजवा देना ॥ 
आ तुम्हे घूँघट डाल दूँ ,
आसमान के लाली की । 
अब दुनिया सोने न देगी ,
तुम  जा कर के सो जाना ॥ 
-------श्री राम रॉय 

Tuesday, 3 September 2013

स्वप्न सुहाने सुबह के …।


आँखों से अलसाई है 
तन - मन में अंगराई है।
 जब - जब आया यह मौसम  ;
याद किसीकी आई है ...।।

आँख खुली जब सपने में 
देखा चाँद मुस्काते हुए ;
सूरज की गर्मी जो  लगी  -
उठ्बैठे  तब सोते हुये ।
स्पर्श मिला किसीका ;
देखा कोमल कलाई है ..।।

थपकी धिरे से लगी 
हृदय मध्य को बाद में ;
लिया भींच बाहों में ,
खोया था उसकी यादों में।
खनक उठी झंकार कोई ;
सोचा कि शर्माई है ..।।

छोड़ सका नही सेज को 
सुबह गुजर गई शाम में ;
जिहवा फिरती रह गई ,
होठों के खाली जाम में ।
जीवन मधुवन कंचन- कंचन ;
 बहे "राम " पुरवाई है ..।।
 ---श्री राम रॉय 

Monday, 3 June 2013

दुनिया से क्यों डरते हैं .....


उनके सूरत को चाँद कहते हैं ।
तो क्या गुनाह करते हैं ॥ 
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चाँदनी मिलती है सिर्फ रातों में ।
 वो दिन -रात नजर आते हैं ॥ 
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उनके पायल की खनक सुनने को । 
हम क्या सब बेकरार रहते हैं ॥ 
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दुनिया उनकी दीवानी है यारों । 
वो दुनिया से क्यों डरते हैं ॥
                                    ---श्री राम रॉय 
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