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Saturday, 8 October 2016

भजन

लगा कर माँ चरणों में प्रीत।
गाओ रे मन माँ भदुली के गीत।।
काम क्रोध को दूर भगाकर
रूठे भाग्य जगाती माँ।
दुर्दिन से छुटकारा मिलता
दुखियों को गले लगाती माँ।।
शेर सवारी भुजा कटारी
वर मुद्रा में शोभित माँ।
पापी जग के कल्याण को
रहती भदुली में नित माँ।।
दूर -दूर के नर -नारी
आते दर्शन करने माँ।
द्वार खोल कर बैठी है
कष्ट हमारा हरने माँ।।
-श्री राम

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