Sunday, 27 November 2016

गरीबों के आंगन बहार

देखा है पहली बार,
गरीबों के आंगन बहार।।

मुश्किल हो गया जीना,
अमीरों की चुए पसीना
अमीरों के घर हाहाकार।।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

भरी हुई तिजोरी,
बिना छेनी-हथौड़ी के तोड़ी
उजड़ गया घर द्वार।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

चुभे नोटों की माला,
गुलाबी मुँह हुआ काला
खजाने में नोट मांगे उधार।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

जो काला धन खाते,
अब ढूँढे गरीबों के खाते
गरीबों के जगमग हुए संसार।।
गरीबों के आँगन बहार।।।।

Thursday, 3 November 2016

मंजिल देखा केवल हमने

कहाँ से पूरे होंगे वे सपने,
कहाँ से आएंगे वे अपने?
थके-थके नैनों से अबतक,
राह निहारा केवल हमने।।

सपनों में संसार बुना,
लाखों में एक चुना
उनके आने की खबर पढ़ी,
अबतक आहट नही सुना।
सुना तो केवल इतना सुना,
पुरे न होते सपने!!!

झीलों में खिले कमल देखा,
देखते ही भौरे ने टोका
नजरों से क्यों पीते हो,
शर्माते हुए खुद को रोका।
हाथ में आये फूलों को,
कभी नही तोड़ा हमने!!!

आसमान में नाव चले,
सूरज से मोती ढले
चाँद सिमट कर पास रहे,
पल में उनका साथ मिले।
जकड़ लूँ उनको बाहों में,
पास हों वे मेरे इतने!!!

दिल को सदा समझाता ,
पर नादान समझ न पाता
बादल से टकराने अरमान चले,
मै धरा पे आहें भरता।
राहें किधर हैं पता नहीं,
मंजिल देखा केवल हमने!!!
----@श्री राम रॉय 9471723852

Tuesday, 1 November 2016

मंजिल देखा केवल हमने

कहाँ से पूरे होंगे वे सपने,
कहाँ से आएंगे वे अपने?
थके-थके नैनों से अबतक,
राह निहारा केवल हमने।।

सपनों में संसार बुना,
लाखों में एक चुना
उनके आने की खबर पढ़ी,
अबतक आहट नही सुना।
सुना तो केवल इतना सुना,
पुरे न होते सपने!!!

झीलों में खिले कमल देखा,
देखते ही भौरे ने टोका
नजरों से क्यों पीते हो,
शर्माते हुए खुद को रोका।
हाथ में आये फूलों को,
कभी नही तोड़ा हमने!!!

आसमान में नाव चले,
सूरज से मोती ढले
चाँद सिमट कर पास रहे,
पल में उनका साथ मिले।
जकड़ लूँ उनको बाहों में,
पास हों वे मेरे इतने!!!

दिल को सदा समझाता ,
पर नादान समझ न पाता
बादल से टकराने अरमान चले,
मै धरा पे आहें भरता।
राहें किधर हैं पता नहीं,
मंजिल देखा केवल हमने!!!
----@श्री राम रॉय 9471723852

Monday, 17 October 2016

भावी

मैंने कहा
सबने सुना ।।।
जो होना होगा
वही होगा।।
किसीने माना
कोई न माना।।।
जिसने जाना
उसने माना।।।
और--
सांसारिकता से
निशचिंत होगया।।।
जिसने न जाना
उसने न माना।।।
और---
सांसारिकता में
चित्त होगया!!!!

Saturday, 8 October 2016

भजन

लगा कर माँ चरणों में प्रीत।
गाओ रे मन माँ भदुली के गीत।।
काम क्रोध को दूर भगाकर
रूठे भाग्य जगाती माँ।
दुर्दिन से छुटकारा मिलता
दुखियों को गले लगाती माँ।।
शेर सवारी भुजा कटारी
वर मुद्रा में शोभित माँ।
पापी जग के कल्याण को
रहती भदुली में नित माँ।।
दूर -दूर के नर -नारी
आते दर्शन करने माँ।
द्वार खोल कर बैठी है
कष्ट हमारा हरने माँ।।
-श्री राम।श्री राम

Sunday, 24 May 2015

भीषण अगन है।।



जलाता पवन है।
भीषण अगन है।।
 
मौसम का कहर।
सुबह हुआ दोपहर।।

शाम लगी आग।
नींद गयी भाग।।

छाया कहीं न।
जिश्म बे पसीना।।

चढ़ गया पारा।
लुप्त जल धारा।।

विकास की कहानी।
प्रलय की निशानी।।
 ---------@sriramroy

Wednesday, 20 May 2015

!!जीवन सार!!

बस कर
मत डर। 

पहर दोपहर
मिले जहर।

बुलंद हौसले
पत्थर मसले। 
चल बेखबर
लम्बी उमर।
दुनिया निराली
सुख की प्याली।

जीभर जीना
कभी न रोना। 

जीवन सार
जीत हार।

--श्रीराम

Friday, 15 May 2015

अकेलापन


छाई मस्ती 
  हुई दोस्ती। 

तोड़े बाँटे 
  छोटे काँटे। 

रोती रात 
   ख़त्म बात। 

हुई भूल 
    दिया फूल। 

 एक किताब 
      एक गुलाब।   
      ***
 Sriram Roy 
      *** 

Saturday, 9 May 2015

ज़ी बहुत सुन्दर है।।

जमीं आकाश के नीचे बेघर है।
ज़िन्दगी मौत से भी बद्तर है।।


दिल दरिया समंदर का पानी
दो पल की  ख़ुशी गमे सागर है।।


महबूब का हर पल क़यामत का
यूँ कहे जिन्दगी आशिके जहर है।।


जिन्दगी कड़ी धुप है चौराहे पर
जिन्दगी फूल काँटो के अंदर है।।


जिन्दगी बेहोश न जोश में अगर
जिन्दगी जिन्दगी है बहुत सुन्दर है।।
      -----श्री राम

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