Sunday, 13 January 2019

मकरसंक्रांति की बधाई...

मकर संक्रांति का दिन आया
सबको करके प्यार।
चूड़ा - दही - तिलकुट खाओ और
खिलाओ  यार।।

देखो - देखो गांव शहर को,
घर-घर छाया है उमंग।
उड़ उड़ कर दिल ऐसे गाए
जैसे आसमान में खिले पतंग।।

गुड़ की खुशबू आंगन आंगन
निराला हिंदुस्तान यही है।
मिलजुल त्योहार मानते हम
भारत की पहचान यही है।।

चूड़ा से गुड़ दूना हो और हो
मीठे गुड़ की भेलियाँ।।
तिलकुट तिलवा के संग करता
लाई अटखेलियाँ।।

नए चावल के खिचड़ी की
महिमा बहुत ही भारी।
ठंडक दूर भागने की
हो गयी है पूरी तैयारी।।

मकर संक्रांति का दिन आया
सबको करके प्यार।
चूड़ा - दही - तिलकुट खाओ और
खिलाओ  यार।।

------श्रीराम रॉय

Saturday, 29 December 2018

नववर्ष की मंगलकामना

गूँथ कर माला प्रेम का
ले हाथ में रोली चन्दन ।
नववर्ष के अवसर पर
प्रिय आपका अभिनंदन।।

रहे बरसते सुख के फूल
प्रिय के आंगन ऊपर से।
रहे सदा खुशहाल आप
यही कामना ईश्वर से।।

मस्तक माँ के चरणों में
झुकना हो तो झुके आपके।
सत्य मार्ग पर बढ़ने से
कभी पाँव न थके आपके।।

नववर्ष में झोली आपकी
खुशियों से भर जाएगी।
देख मुस्कुराहट आपकी
सारी दुनिया मुस्कुराएगी।।

मुख बोले प्रेम की बोली
प्रेम का ही हो स्पंदन।
नववर्ष के अवसर पर
प्रिय आपका अभिनंदन।।

----श्रीराम  रॉय

Thursday, 20 December 2018

होश उड़ जाए (ग़ज़ल)

एक बार छनका दो पायल/ कि /
सबके होश उड़ जाए।
मैं तेरे पास आ जाऊं
तुम मेरे पास आ जाए ।।

ना बीच में हो कोई ,
हमारा हो मिलन ऐसा।
बाहों में डाल कर बाहें ,
मिलन के गीत गुनगुनाए ।।

घटाएं घिर आए फिर,
हमारे आसमान में ऐसे।
मैं तुझ पर छा जाऊं ,
तू मुझ पर छा जाए।।

जो दर्द हमारे दिल को,
दुनिया ने दिया है ।
मैं अपना दर्द सुनाऊं तुमको ,
तू अपना दर्द सुना जाए।।

  हो मिलन हमारा ऐसा ,
जैसे सागर और गहराई का ।
जितना दिल मेरा पाये,
उतना तेरा दिल भी पा जाए।।

एक बार छनका दो पायल,
कि मेरे होश उड़ जाये।।
@sriramroy

Monday, 17 December 2018

बहुत ठंड है जी-----

ठंडक बहुत बढ़ते जा रही , ठंडक में मेरी ताजी रचना आपके अवलोकन  हेतु
प्रस्तुत है.....☺
-----------@श्रीराम रॉय
🍃🍂🍃🍂🍃🍂
है करवट बदला मौसम ने
दिसंबर के हसी महीने में ।
बढ़ती जाती है अब ठंडक,
काँप काँप कर सीने में ।।

बहती हवा है ऐसी ,
निकलने से बाहर जी डरे ।
ठिठुरा बदन कंबल के नीचे ,
दिन बीते हैं पड़े-पड़े। ।

आसमान में काले बादल,
पूरब की हवा ले आती है ।
हल्की हल्की बारिश से ,
यह ठंडक बढ़ती जाती है ।।

हो जाए कुछ अब ऐसा ,
जो ठंडक से आराम दिला दे ।
आ जाए जिगर में गर्मी ,
वह मीठा मीठा जाम पिला दे।।
********
@श्री राम राय

Friday, 14 December 2018

बेचारा एडमिन!!!

#whatsapp ग्रुप को चलाने वाले आदरणीय अडमिनो को समर्पित मेरी यह रचना***
-------------------------------------------------
व्हाट्सएप की झोली में ,
जो हो मन में डालिये।
जैसे माल हो फोकट का,
ठूँस ठूँस कर खा लिये।

बेखबर हो  राहो पर जो
डग मग कर के चलते हैं।
ठोकर खा कर गिरने वाले
खटिये पर ही मिलते हैं।

हर घर में झांकते रहना
जिनकी बनी हुई हो आदत।
डाँट मिलती डेग डेग पर
होती उनकी कहाँ इज्जत?

एडमिन से टकराने की
हिम्मत सबकी नही होती।
ग्रुप एडमिन की फुलवारी
उड़ती तितली नहीं होती!!!
रचना- श्रीराम रॉय
@sriramroy

Monday, 10 December 2018

जनता तेरा नेता दीवाना....

जनता तेरा नेता दीवाना
हाय राम .....
इलेक्शन में डाले दाना ।
धंधा है यह इनका पुराना
हाय राम ......
इलेक्शन में डाले दाना ।।

भोली-भाली लगती है
सूरत इनकी प्यारी
इनको देखकर शरमा जाए
लूला लंगड़ा भिखारी ।
गद्दी छोड़ के गांव में ,
हाय राम ....
आंखों से आंसू बहाना ।
जनता तेरा नेता दीवाना ।।

गांधीजी के सच्चे चेले
पेप्सी कोला पीते हैं
सर की टोपी भूल गए
खद्दर पहन कर जीते हैं।
मिस वर्ल्ड से हाथ मिलाए
हाय राम....
यह गाए अंग्रेजी गाना ।
जनता तेरा नेता दीवाना।।

जनता को छिलके देते
खुद खाते हैं केले
पता नहीं हर बार  कैसे
बन जाते एमपी एमएलए ।
हिंदुस्तान में मुंह धोते
हाय राम ........
इटली में खाये खाना।
जनता तेरा नेता दीवाना ।।
इलेक्शन में डाले दाना।।
----श्रीराम रॉय

Tuesday, 4 December 2018

तुम्हारा हो जाता(गज़ल)--

कमबख्त तुम्हारा हो जाता
तेरे दिल को यदि मैं भा जाता।

एक बार आवाज तो दे देते
तेरे दर पर दौरा आ जाता ।

जब जब देखा तुमने मुझको
इस दिल को मजा आ जाता।

बरसों बीत गए अब तो
कब का पास तेरे आ जाता ।

तुम खेले दिल से मेरे
तेरे दिल से खेलने आ जाता ।

सूखे बादल सुखी दरिया
ना छा पाता ना आ पाता।
----सर्वाधिकार सुरक्षित @श्रीराम रॉय

Thursday, 29 November 2018

माँ

-----माँ-----------

माँ का कोई मोल नहीं
शब्द माँ अनमोल है
चाहे नर हो या पशु
सबसे सुंदर बोल है ।।

रहते खेलते जिसके अंदर
वह आंचल मां का सुंदर
छूटा जो ममता का आंचल
पग-पग लगता डर ही डर।।

जिसने मां से प्यार किया
जग उसका सत्कार किया
मां को रुलाने वाले को
भगवान भी दुत्कार दिया ।।

मां यदि नहीं होती
अपनी भी दुनिया कहां होती
फेंक यदि कूड़े में जाती
यह जिंदगी भी कहां होती।।
@sriramroy

Tuesday, 13 November 2018

बाल दिवस

बाल दिवस के अवसर पर
बच्चों के लिए प्रस्तुत है
मेरी यह बाल रचना🙏
**************
बाल दिवस के अवसर पर।
चाचा नेहरू को प्रणाम है।।

खूब पढ़ाई करनी है और
जग में करना नाम है ।
बाल दिवस के अवसर पर
चाचा नेहरू को प्रणाम है ।।

प्रथम प्रधानमंत्री देश के
जवाहरलाल हमारे थे ।
बच्चे कहते चाचा उनको
जान से  बढ़कर प्यारे थे ।।

नेहरू कुर्ता आज भी
सबसे अच्छा लगता है।
गाँधी टोपी पहनने वाला
सबसे सच्चा दिखता है।।

फूल गुलाब का कहता है
नेहरू चाचा अमर रहें।
हम बच्चे भी फूल से कोमल
लेकिन जग में निडर रहें।।
   @ श्रीराम रॉय, ums अमझर, mayurhand, चतरा, झारखंड

Sunday, 11 November 2018

भाव के रंग


...............................
भाव रंग से बनी रंगोली
................................
पिया के आने की आशा में
रंगों की पोटली खोली ।
दीप सजाएं द्वारे द्वारे
भाव रंग से बनी रंगोली ।।
रात रात भर जागे जागे ,
पिया जवान सीमा पर आगे ।
लाल रंग की धारा बहती
घाव जंग से बनती होली ।।
पिया के आने की आशा में
भाव रंग से बनी रंगोली.....।
रंग उमंग के उड़ गाते
भीड़ लगाते रिश्ते नाते ,
ढोल नगाड़े चीखते रहते
हरे बांस की सजती डोली ।।
पिया के आने की आशा में
भाव रंग से बनी रंगोली.....।।

Tuesday, 8 May 2018

बेटियाँ मोम की

गलियों से निकल
चौराहे पर
बढ़ते जा रहे
कुछ हाथो में
तख्तियां
कुछ हाथों में
मोमबत्तियां।
निःशब्द अंधेरे में
जलती मोमबतियो के
प्रकाश में
उसकी धुँधली फ़ोटो
जो, भेड़िये से संघर्ष में
बचा न पाई बोटियाँ।
भेड़ियों से बेटे
हिरण सी बेटियाँ
देख न पाती दुनिया।
छुपती, सहमति
बहुत मजबूरी
जीने को छटपटाती
मोम सी बेटियाँ,
पूछती चौराहे पर
टिमटिमाती मोमबतियां
कब तक जलेगी बेटियाँ....

---/श्री राम रॉय

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