Monday, 12 March 2018

परीक्षा भवन में कैमरे

ये टंगे हुए
ऊंची दीवारों पर
कोने से
झांकते
सब कुछ
रिकॉर्ड कर
दूर बैठे
मजिस्ट्रेट को
दर्शन
करा रहे
कैमरे
परीक्षा भवन
में....।
परीक्षा भवन की
हाईटेक व्यवस्था
क्लास रूम
की याद
दिलाते हुए
कैमरे ...।
पढ़ाई के समय
क्लास छोड़ना
किताबों से
मुँह  मोड़ना
महंगा पर रहा
उत्तर लिखने के
बदले
मिले प्रश्नों को ही
कॉपी पर
रगड़ रहा ....
पॉकिट से
नकल  के पुर्जे
निकले कैसे....
इंसानी
आंखों से
तेज जो
सी सी टीवी कैमरे।।

Wednesday, 14 February 2018

प्यार ही पूजा


सबसे बड़ा पूण्य
मेरे यार कर लेना।
करना हो कुछ तो
बस प्यार कर लेना||

प्यार ही पूजा है,
प्यार चीज बड़ी है।
प्यार ही कृष्ण की,
बजती बाँसुरी है।।

प्यार ही गोपियाँ,
प्यार ही राधिका।
राधा भी थी प्यारे,
प्यार की साधिका।।

जो चाहते अगर,
प्यार को समझना।
मीरा बन कर होगा,
प्याला विष का पीना।।

खो जाता प्यार में,
प्यारे यह तन मन।
जीना और मरना,
प्यार में है समर्पण।।

चाहते गर खुशियां,
इज़हार कर देना।
बंद मुट्ठी में सारा,
संसार कर लेना।।

Tuesday, 13 February 2018

मेरा फूल गुलाब का...

इंतज़ार में तेरे जवाब का।
रखा है फूल गुलाब का

आएगा जब खत तेरा,
भेजूंगा फूल गुलाब का।।

सीने में सजा कर रखना इसको,
दिल है फूल गुलाब का।।

यादों के खुशबू तुम्हें मुबारक,
कहेगा फूल गुलाब का।।

तुम चाहे तो छोड़ दो मुझको,
मत फेंको फूल गुलाब का।।

मैं न तेरे प्यार के काबिल,
काबिल है फूल गुलाब का।।

गर गैरों से इश्क हो जाये,
देना फूल गुलाब का।।

है तमन्ना कोई आशिक रखे,
मेरा फूल गुलाब का।।

------श्रीरामरॉय

Wednesday, 7 February 2018

अन्नदाता

वह किसान है।
चकाचौंध से दूर ,
धरती का भगवान है।।

वह किसान है......

मौसम का साथ मिला,
हल बैल साथ चला।
संघर्ष भरा जीवन,
सच्चा इंसान है।।

वह किसान है...

सीखा न कभी रोना ,
धरती में उगा सोना।
दुनिया का पेट भरने,
रहता परेशान है।।
वह किसान है.....

Thursday, 11 January 2018

आग ताप लो....

जग का उल्टा पासा है
बस आग ही आशा है।
कैसे निकले कोई बाहर
फैला घोर कुहासा है।।

खासी होती खाएं खाएं
बहे शीतलहरी सायं सायं
सुबह सुबह निराशा है।।
फैला घोर कुहासा है।।।

सूरज बैठा आँखे मूंदे
बर्फ बनी कोहरे की बूंदे
कुदरत ने दिया झांसा है।।
फैला घोर कुहासा है।।

Wednesday, 6 December 2017

सब बच्चा स्कूल में

🥀🥀🙏💐💐
हर बच्चा स्कूल में ।।
हर बच्चा स्कूल में।।
👩‍🌾👩‍🎤👩‍🌾👩‍🎤
😒रो रहा है शिक्षक
सिसक सिसक स्कूल में।
सारी इच्छाएं खाक बनकर,
😩मिल रही हैं धूल में।।
रात रात भर नींद न आती ,
और 😭चिल्लाते सेज पर
खुशबू हो हर फूल में
हर बच्चा स्कूल में।।
🌷🌹🌷🌹🌷
रोज रोज आदेश निकलता
🏋दर्द हुआ है कंधे में ।
अब तो घुट घुट जी कहता
🔥आग लगे इस धंधे में ।।
बच्चों के मां बाप भी अब,
🙌ताली बजाते थाली में ,
तड़प रहा🎪ज्ञान का मंदिर
🦀उलझ उलझ कर शूल में।
हर बच्चा स्कूल में
हर बच्चा स्कूल  में।।
🌷🌹🌷🌹🌷
गांव गांव का मुख्यालय
🎭बना हुआ पाठशाला है।
पाठ की चिंता नहीं किसीको
👩🏻‍🍳चिंतन में पाकशाला है।।
यही देखने को मिलता,
🐒राजनीति के दाव सभी,
पूँछ विहीन🤼‍♂ आपस में भिड़ते
कैसे हो खुशबू  फूल में ।।
👩‍🌾👩🏻‍⚕👨‍🌾👩🏻‍⚕
हर बच्चा स्कूल में
हर बच्चा स्कूल में
🌷🌹🌷🌹🌷
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Saturday, 23 September 2017

आगे बढ़, इतिहास गढ़...

छोड़ डरना,
सीख लड़ना।
जो डरा है,
वो मरा है।
यही कहावत,
बदले किस्मत।
जो हारा ,
हुआ बेचारा।
सबसे सस्ता ,
सत्य  रास्ता।
झूठ अंधा,
गले का फंदा।
बाजू में दम,
छोड़ गम।
आगे बढ़,
इतिहास गढ़।
Ssssss श्रीरामरॉय

Wednesday, 13 September 2017

हिंदी दिवस

हिंदी दिवस....

हिंदी दिवस को आज हम यूँ मना रहे
सांसो में अंग्रेजीयत ,उर्दू सुना रहे।।

हिंदी के नाम पर अभी सवेरा न हुआ है ।
है रस्म रात भर का यह पुरा न हुआ है ।।

जाति धर्म भाषा क्षेत्रवाद अनेक है   ।
हिंद है धरा हिंदी सब एक है ।।

कोने में बैठी हिंदी कहती है चीख चीख ।
बस याद करते हो मुझे आज की तारीख ।।

जवानी खाक आएगी जो बचपन में खोई हो ।
पहले हो  बात हिंदी की जुबान कोई हो ।।

मुस्कुराते हैं खाकर हम दवा अंग्रेजी में ।
अब तक लिखे न गए पुर्जे हिंदी में।।
...........श्री राम राय

Monday, 12 June 2017

दुःख के गीत

दुःख की घड़ी में
कोई न देता
साथ प्यारे।।
कोई न देता
साथ ।।

सुख घड़ी में मुट्ठी बंधी
औऱ दुःख में खुले हाथ।।

रोता मुखड़ा जो भी देखे,
हँस कर बोले बात।।

न कोई जाने न पहचाने
दुखिया की भी जात।।

अपने बेगाने हो जाये जब
दिन का उजाला रात।।

गन कि गंगा रो रो सूखी 
अब जहर लगे बरसात।।
कोई न देता
साथ प्यारे।।
------श्रीराम रॉय

Saturday, 18 March 2017

भारत माता

दिन में हुई रात!
गर्मी में बरसात!!
कैसे हुई
ऐसी बात!
न सूरज निकला
न चाँद आया,
न लू चली,
न बादल छाया।।
चमकी केवल
विजलियाँ ऐसे
जैसे
सूरज हो जलाता,
चाँद हो चमकता ।
गगन से
धरा पर,
आँधियों में कुछ
उड़ा घर।
छप्पड़ को लगा
थप्पड़ किसीका-
बस्तिओं में
धुंआ ही धुआं था,
न आग लगी
पर सबकुछ जला था,
शहरो से दूर
लोग चिल्ला रहे थे,
रोटी, मकान के लिए।
लाश जलाने शमशान के लिए।
झोपड़ी में माँ,
बच्चे को लहू पिला रही थी।
शहरों में बैठी दौलत,
कुत्ते को दूध पिला रही थी।।।

भारत माता

दिन में हुई रात!
गर्मी में बरसात!!
कैसे हुई
ऐसी बात!
न सूरज निकला
न चाँद आया,
न लू चली,
न बादल छाया।।
चमकी केवल
विजलियाँ ऐसे
जैसे
सूरज हो जलाता,
चाँद हो चमकता ।
गगन से
धरा पर,
आँधियों में कुछ
उड़ा घर।
छप्पड़ को लगा
थप्पड़ किसीका-
बत्तियों में
धुंआ ही धुआं था,
न आग लगी
पर सबकुछ जला था,
शहरो से दूर
लोग चिल्ला रहे थे,
रोटी, मकान के लिए।
लाश जलाने शमशान के लिए।
झोपड़ी में माँ,
बच्चे को लहू पिला रही थी।
शहरों में बैठी दौलत,
कुत्ते को दूध पिला रही थी।।।

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